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बस यूँ ही भाग 1

300.00

“बस यूँ ही…”
ज़िंदगी जितनी बड़ी है, उतनी ही छोटी भी।
कभी एक चाय की चुस्की में मुस्कान मिल जाती है,
कभी एक गली के मोड़ पर पुरानी यादें।
इस पुस्तक में सौरभ दत्त ने
उसी रोज़मर्रा की दुनिया को
हल्की-सी मुस्कराहट और नरम-सी नज़ाकत के साथ शब्दों में गूंथा है।
यहाँ आपको—
कभी पड़ोस वाली आंटी मिलेंगी,
कभी गोलगप्पों का फ़लसफ़ा,
कभी जिम न जाने के बहाने,
कभी रिश्तों की गंभीर पर सधी हुई परछाइयाँ,
कभी पंजाबियत की महक,
और कभी बचपन की सच्ची, मीठी यादें।
कविताएँ न तो दार्शनिक बनना चाहतीं हैं ,
और न ही उपदेश देना।
ये बस आपकी ही दुनिया हैं—
आपके ही घर की आवाज़ें,
आपके दिल के हल्के-फुल्के जज़्बात,
और ज़िंदगी की अनगिनत छोटी-छोटी हँसी।

बस यूँ ही भाग 2

300.00

“बस यूँ ही…”
ज़िंदगी जितनी बड़ी है, उतनी ही छोटी भी।
कभी एक चाय की चुस्की में मुस्कान मिल जाती है,
कभी एक गली के मोड़ पर पुरानी यादें।
इस पुस्तक में सौरभ दत्त ने
उसी रोज़मर्रा की दुनिया को
हल्की-सी मुस्कराहट और नरम-सी नज़ाकत के साथ शब्दों में गूंथा है।
यहाँ आपको—
कभी पड़ोस वाली आंटी मिलेंगी,
कभी गोलगप्पों का फ़लसफ़ा,
कभी जिम न जाने के बहाने,
कभी रिश्तों की गंभीर पर सधी हुई परछाइयाँ,
कभी पंजाबियत की महक,
और कभी बचपन की सच्ची, मीठी यादें।
कविताएँ न तो दार्शनिक बनना चाहतीं हैं ,
और न ही उपदेश देना।
ये बस आपकी ही दुनिया हैं—
आपके ही घर की आवाज़ें,
आपके दिल के हल्के-फुल्के जज़्बात,
और ज़िंदगी की अनगिनत छोटी-छोटी हँसी।

मन की परिक्रमा

Original price was: ₹300.00.Current price is: ₹299.00.

काव्य संग्रह “मन की परिक्रमा” मेरे अंतर्मन की उस यात्रा का प्रतिफल है, जिसमें मैंने जीवन से जुड़े समाज के विविध रंगों, अनुभवों और प्रश्नों को आत्मसात किया है। यह संकलन मेरे भीतर के संसार की वह परिक्रमा है, जो शब्दों के माध्यम से बाहर प्रकट हुई है। यदि मेरी कविताएँ पाठकों के हृदय को छू सकें, उन्हें सोचने, महसूस करने और जुड़ने का अवसर दें, तो यह मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।

मेरी यादों के धागे

300.00

मेरी कविताओं की किताब ‘मेरी यादों के धागे’ बहुत ही रोचक और ज्ञानवर्धक है। मेरा पाठकों से निवेदन है कि वे इन कविताओं को अवश्य पढ़ें और रूहानी लाभ उठायें।

वो रंग प्यार के थे

300.00

About the Book:

“वो रंग प्यार के थे” दिल को छू लेने वाली भावनाओं की अभिव्यक्ति है जिसे लेखक ने शब्दों के माध्यम से आपके समक्ष प्रस्तुत किया है। इस संकलन की कविताएं जीवन के अनकहे एहसासों, गहरे अनुभवों और लेखक की कल्पनाओं का सम्मिश्रण हैं जो पाठकों को अवश्य पसंद आएगी।

About the Author:

मनोज कृष्णन एशियन लिटरेरी सोसाइटी (एएलएस) के संस्थापक हैं जो दुनिया भर के हजारों पाठकों, लेखकों और कवियों का समुदाय है। वह “कनिष्का” उपन्यास, कविता संग्रह-“द फ्रेगरेंस ऑफ नेचर एंड लव”, “इन्चेंटिंग कोरिया”, “सांग ऑफ़ साइलेंस”, “मैं शिव बन जाऊँगा”, “नागमणि दर्शन”, एवं “वो धुआं कुछ रौशन था” के लेखक हैं। उन्होंने कविताओं और लघु कथाओं की तीस से अधिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संकलनों का संपादन किया है।

वो सिलवटें करार की थीं

Original price was: ₹300.00.Current price is: ₹299.00.

“वो सिलवटें करार की थीं” – हृदय की गहराइयों से निकलीं वो कोमल भावनाएँ, जिन्हें लेखक ने शब्दों में बुनकर आपके समक्ष प्रस्तुत किया है। इस काव्य-संग्रह की हर रचना जीवन के अनकहे रहस्यों, गहन अनुभवों और उड़ान भरती कल्पनाओं का अनुपम मेल है, जो पाठकों के मन को छूकर अवश्य पसंद आएगी।

 

आजा़द पंछी

250.00

‘आजा़द पंछी’ काव्य संकलन अमिता कर की साठ कविताओं का संग्रह है। इस काव्य संकलन की कई सारी कवितााएँ मार्मिक और हृदय स्पर्शी हैं । अपनी भावना, अपनी अनुभूति, शब्दों में पिरोया है अमिता कर ने। उम्मीद है ‘आजा़द पंछी’ काव्य संकलन सभी पाठकों को पसंद आएगी।

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