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प्रेम के अथाह सागर

300.00

मेरी पुस्तक ‘प्रेम के अथाह सागर’ में विविध विषयों पर लिखी 60 कविताएँ समाहित हैं जो मैंने एशियन लिटरेरी सोसाइटी नेशनल पोइट्री राइटिंग मंथ (NaPoWriMo) 2025 एवं 2026 (1 अप्रैल से 30 अप्रैल 2025 एवं 1 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026) के आयोजन के अंतर्गत लिखी थी। इसके तहत हिंदी और अन्य भाषाओं में प्रतिभागियों को अप्रैल माह के 30 दिनों तक प्रतिदिन एक दिए हुए प्रॉम्प्ट पर एक नई कविता लिखने और साझा करने की चुनौती दी जाती है।
एएलएस अपने समुदाय के सदस्यों के लिए लेखन को एक नियमित आदत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। आशा करती हूँ कि मेरी कविताएँ पढ़कर पाठकों को असीम आनंद की प्राप्ति होगी। प्रेम के अथाह सागर में वे खुद को भी डूबा हुआ पाएँगे और प्रेम के रहस्यमय सफर को कहीं अपने अंतर्मन में झाँकते हुए तलाशेंगे।

दूर कहीं मंज़िल तो होगी

300.00

काव्य संग्रह “दूर कहीं मंज़िल तो होगी” मेरे लिए केवल कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि मन के भीतर से गुजरती हुई एक ऐसी यात्रा है, जिसमें मैंने समय, जीवन, युद्ध, मनुष्य, स्मृतियों, प्रकृति और उम्मीद को अलग-अलग नहीं, बल्कि एक-दूसरे से जुड़े हुए अनुभवों की तरह देखा है।

कुछ शिकन की थी लकीरें

300.00

“कुछ शिकन की थी लकीरें” मन की कोमल संवेदनाओं का काव्य रूप है, जिन्हें लेखक ने दिल से निकले शब्दों में पिरोकर पाठकों के समक्ष प्रस्तुत किया है। इस काव्य संकलन की प्रत्येक रचना जीवन के अनुभवों और कल्पनाओं का खूबसूरत संगम है। आशा है कि ये कविताएँ पाठकों के हृदय को स्पर्श कर उन्हें आत्मीयता का अनुभव कराएँगी।

Cosmic Dance

350.00

Cosmic Dance, an anthology of sixty poems, sways with rekindled rhythm and the resolve to give my best — one poem, every day.

The trinkets I tied willingly around my feet sent pulsating energy. I danced along with every poem that emerged straight from my heart.

Each poem breathes differently with earth, water, air and fire, held together by emotion.

The cover art is neurographic — lines connecting, nodes lighting up, the way thoughts connect when we stop pretending we’re separate.
That’s the cosmic dance to me. Not stars far away, but the pattern that holds us all.

These poems are a marathon — proof that I walked 60 days with silent prayers as my guiding light till the very end.

The Rhythm of Falling Leaves

300.00

Through these verses, the poet explores the delicate rhythms of life—its transience, love and loss, silent bonds, resilience, and quiet renewal—drawing from nature, mythology, and heartfelt personal reflections. Infused with lyrical grace, profound emotion, and quiet introspection, they leave a lasting impression that resonates long after reading.

This exquisite poetry collection enthralls readers, enchanting their hearts and souls.

बस यूँ ही भाग 2

300.00

“बस यूँ ही…”
ज़िंदगी जितनी बड़ी है, उतनी ही छोटी भी।
कभी एक चाय की चुस्की में मुस्कान मिल जाती है,
कभी एक गली के मोड़ पर पुरानी यादें।
इस पुस्तक में सौरभ दत्त ने
उसी रोज़मर्रा की दुनिया को
हल्की-सी मुस्कराहट और नरम-सी नज़ाकत के साथ शब्दों में गूंथा है।
यहाँ आपको—
कभी पड़ोस वाली आंटी मिलेंगी,
कभी गोलगप्पों का फ़लसफ़ा,
कभी जिम न जाने के बहाने,
कभी रिश्तों की गंभीर पर सधी हुई परछाइयाँ,
कभी पंजाबियत की महक,
और कभी बचपन की सच्ची, मीठी यादें।
कविताएँ न तो दार्शनिक बनना चाहतीं हैं ,
और न ही उपदेश देना।
ये बस आपकी ही दुनिया हैं—
आपके ही घर की आवाज़ें,
आपके दिल के हल्के-फुल्के जज़्बात,
और ज़िंदगी की अनगिनत छोटी-छोटी हँसी।