काव्य संग्रह “मन की परिक्रमा” मेरे अंतर्मन की उस यात्रा का प्रतिफल है, जिसमें मैंने जीवन से जुड़े समाज के विविध रंगों, अनुभवों और प्रश्नों को आत्मसात किया है। यह संकलन मेरे भीतर के संसार की वह परिक्रमा है, जो शब्दों के माध्यम से बाहर प्रकट हुई है। यदि मेरी कविताएँ पाठकों के हृदय को छू सकें, उन्हें सोचने, महसूस करने और जुड़ने का अवसर दें, तो यह मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।
नवरस
₹350.00नवरस काव्य संकलन में जीवन से जुड़े नौ रसों (श्रृंगार, करुणा , हास्य, रौद्र, वीर, भयानक, वीभत्स, अद्भुत, और शांत रस)के भाव को शब्दों में पिरोकर कविता के रूप में पाठकों के सम्मुख पेश किया गया है। आशा है कि पाठकों को ये कविताएँ पसंद आएँगी।

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